मंचपरसमारोहकेदलनायकएवंदेवसंस्कृतिविश्वविद्यालयकेउपाध्यक्षडॉ. चिन्मयपंड्या, हिमाचलप्रदेशसेसांसदअनुरागठाकुरऔरराष्ट्रीयअनुसूचितजनजातिआयोगकेअध्यक्षअंतरसिंहआर्यसहितकईगणमान्यउपस्थितरहे।
माताजीऔरगुरुदेवकाजीवनसमाजकोसमर्पित
नड्डानेकहाकिमाताजीकेआदर्शऔरमूल्यसमाजकोसहीदिशामेंलेजानेवालेथेऔरपरिवारोंकोश्रेष्ठबनातेथे।उन्होंनेकहा, “सेवा, संवेदना, धैर्यऔरसमर्पण, जोमाताजीकेजीवनमेंथा, उसेहमेंआगेलेकरचलनाहै, उससेहमेंप्रेरणालेनीहै।”
उन्होंनेकहाकिभारतीयसंस्कृतिमेंनारीकोशक्ति, सृजन, करुणाऔरसंस्कारकाआधारमानागयाहै, औरइनमूल्योंकोदैनिकजीवनमेंउतारनाहोगा।
गुरुदेवपं. श्रीरामशर्माआचार्यकोयादकरतेहुएनड्डानेकहाकिउनकीसाधना, प्यारऔरसेवामानवताकेकल्याणकेलिएसमर्पितथी।“जोउत्कर्षउन्होंनेजीवनमेंपाया, वहअपनेलिएनहींरखा, बल्किसमाजकोसमर्पितकिया।यहीसबसेबड़ीबातथी,”उन्होंनेकहा।उन्होंनेआयोजकोंकोसांस्कृतिकचेतनाजगानेऔरसमाजकोउसकीज़िम्मेदारीकेप्रतिसजगकरनेकेलिएबधाईदी।
सौसालमेंपरिस्थितियाँबदलीं, मूल्यनहीं
नड्डानेकहाकिसौवर्षकीयात्रामेंकईचुनौतियाँआईं, लेकिनसत्य, सदाचार, सेवा, करुणाऔरमानवकल्याणकीप्रासंगिकताकभीसमाप्तनहींहुई।“परिस्थितियाँबदलीं, चुनौतियाँबदलीं, लेकिनसत्यहमेशाअटलरहा,”उन्होंनेकहा।
गायत्रीपरिवारकीदृष्टिकाउल्लेखकरतेहुएउन्होंनेकहाकियुगबदलनेकामार्गस्वयंकोबदलनेसेहोकरजाताहै।“समय, परिस्थितिऔरहमारेदैनिकजीवनकेकारणहमेंबाहरदेखनेकीबहुतआदतहोतीहै।अपनेअंदरझाँकनासबसेपहलाकामहोनाचाहिए,”उन्होंनेकहा।उन्होंनेनारीशक्ति, युवाशक्तिऔरसमाजसेराष्ट्रकेकल्याणकासंकल्पलेनेकाआह्वानकिया।
नशामुक्ति, पर्यावरणऔरमातृशक्तिकेकार्योंकीसराहना
नड्डानेकहाकिगायत्रीपरिवारनेकेवलपूजा-पद्धतिपरध्याननहींदिया, बल्किसमाजमेंअच्छेसंस्कारलानेकाकामभीकिया।उन्होंनेकहाकिपरिवारसेजुड़ीयुवाशक्तिनशानिवारणऔरनशामुक्तिमेंलगीहै, औरलोगोंकोव्यसनसेदूरकरनेकायहप्रयास“बहुतहीसराहनीय”है।
उन्होंनेराष्ट्रभक्तिसेओतप्रोतयुवाआयोजनों, पर्यावरणसंरक्षणकेउपक्रमोंऔरसमाजमेंजागरूकताफैलानेकेप्रयासोंकेलिएभीगायत्रीपरिवारकोसाधुवाददिया।मातृशक्तिकेमाध्यमसेचलरहेकार्योंपरउन्होंनेकहा, “हमजानतेहैंकिमाताकेमाध्यमसेहीपरिवारकोसंस्कारमिलतेहैं।”सामाजिककुरीतियोंकोदूरकरनेकेकामकोउन्होंनेविशेषरूपसेसराहनीयबतायाऔरकहाकिइसीमाध्यमसेसमाजऔरयुगबदलेगा।
“लाखोंसाथीइसकाममेंलगेहैं”
नड्डानेकहाकिअनुरागठाकुरनेविकसितभारतपरविस्तारसेबातकीहै, औरप्रधानमंत्रीनरेंद्रमोदीकेनेतृत्वमेंदेशविकसितभारतकीओरअग्रसरहै।डॉ. चिन्मयपंड्याकेसंस्कारकेमाध्यमसेदेशऔरसमाजकोबदलनेकेविचारोंकोउन्होंनेप्रेरणादायीबताया।
अपनेसंबोधनकेअंतमेंउन्होंनेकहा, “यदिहमेंमाताजीकोयादकरनाहै, गुरुदेवकोयादकरनाहै, औरअखंडज्योतिकीतरहअखंडरहतेहुएसमाजकाकामकरनाहै, तोसबसेपहलेअपनीस्व-चेतनाजगीरहे, इसकीचिंताकरनीपड़ेगी।”
उन्होंनेकहाकिइसकाममेंवेअकेलेनहींहैं, लाखोंसाथीइसमेंलगेहैं, इसलिएयुगनिर्माणमेंकोईरुकावटनहींआएगी।“अच्छेसंस्कारोंकेसाथहमदेशसेवामेंलगेंगे, समाजकोआगेबढ़ाएँगे,”उन्होंनेकहा।कार्यक्रमकेअंतमेंअखिलविश्वगायत्रीपरिवारकीओरसेनड्डाकाआभारव्यक्तकियागयाऔरअतिथियोंकासम्मानकियागया।