नाथद्वारा को पवित्र धार्मिक नगरी घोषित करे सरकार: वीरेन्द्र सिंह सोलंकी
राष्ट्रीय हिन्दू शक्ति संगठन के प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने मांग की कि श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा को पवित्र धार्मिक नगरी घोषित किया जाए और नगर सीमा में मांस-मछली-अंडा-मदिरा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, इससे पहले टेम्पल बॉण्ड से धन जुटाने की योजना पर अमल किया जाए।
JR Choudhary Editorial Authority • 30 Mar, 2026Editorial Desk
July 12, 2026 • 10:12 PM | नाथद्वारा/उदयपुर
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नाथद्वारा को पवित्र धार्मिक नगरी घोषित करे सरकार: वीरेन्द्र सिंह सोलंकी
नाथद्वारा/उदयपुर। पुष्टिमार्गीय वैष्णव सम्प्रदाय के प्रमुख आस्था केंद्र और भगवान श्रीनाथजी की पावन नगरी नाथद्वारा को पर्यटन विकास के नाम पर प्रस्तावित टेम्पल बॉण्ड से धन जुटाने से पहले ‘पवित्र धार्मिक नगरी’ घोषित करने की मांग जोर पकड़ रही है। राष्ट्रीय हिन्दू शक्ति संगठन ने इस मांग को मजबूती से उठाते हुए कहा है कि “पहले पवित्र नगरी, फिर टेम्पल बॉण्ड”।
संगठन के राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जिस प्रभु श्रीनाथजी की विश्वव्यापी आस्था और धार्मिक प्रतिष्ठा के आधार पर राजस्थान सरकार टेम्पल बॉण्ड के जरिए संसाधन जुटाने की योजना बना रही है, उस नगरी की धार्मिक पवित्रता की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पहले नाथद्वारा को पवित्र धार्मिक नगरी घोषित करो, फिर उसके नाम पर पर्यटन बॉण्ड जारी करो।”
सोलंकी ने अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों का उदाहरण देते हुए कहा कि पुष्कर, हरिद्वार, ऋषिकेश, अयोध्या, तिरुपति और पालिताना जैसे पवित्र स्थानों में धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं लागू हैं। ऐसे में उत्तर भारत के प्रमुख वैष्णव तीर्थ नाथद्वारा को भी समान संरक्षण क्यों नहीं मिलना चाहिए? उन्होंने जोर देकर कहा कि नाथद्वारा केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रभु श्रीनाथजी का जीवंत धाम है।
संगठन ने नाथद्वारा नगर सीमा में मांस, मछली, अंडा और मदिरा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है। सोलंकी ने कहा, “श्रीनाथजी की आस्था के नाम पर धन जुटाने से पहले उनकी नगरी की धार्मिक आत्मा की रक्षा करनी चाहिए। गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान समेत देश-विदेश से हर साल करीब 80 लाख श्रद्धालु श्रीनाथजी के दर्शन के लिए नाथद्वारा पहुंचते हैं। ऐसे पवित्र तीर्थ में इन वस्तुओं की खुली बिक्री से कई भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है और वैष्णव परंपरा की सात्विकता प्रभावित होती है।”
वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने सरकार से अपील की कि विकास कार्यों में विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जाएं, लेकिन धार्मिक पहचान को व्यावसायिक ब्रांड में बदलने की कोशिश न की जाए। उन्होंने कहा, “श्रीनाथजी हमारी आस्था हैं, कोई व्यावसायिक ब्रांड नहीं। सरकार पारदर्शी तरीके से विकास करे, हम इसका स्वागत करते हैं, लेकिन पवित्रता और आर्थिक महत्व के बीच विरोधाभास नहीं होना चाहिए।”
नाथद्वारा को टेम्पल बॉण्ड मॉडल से जोड़ने की योजना सामने आने के बाद यह मांग और प्रासंगिक हो गई है। संगठन का मानना है कि नाथद्वारा की धार्मिक पहचान को आर्थिक संसाधन जुटाने का माध्यम मात्र नहीं बनाया जा सकता। सरकार को इस पहचान की रक्षा की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी होगी।
केंद्र और राज्य सरकार के कई बड़े नेता व मंत्री भी श्रद्धा से श्रीनाथजी के दर्शन करने आते हैं। सोलंकी ने कहा कि इन लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। नाथद्वारा को पवित्र धार्मिक नगरी का दर्जा देकर और नगर सीमा में उचित प्रतिबंध लगाकर इस पावन स्थल की गरिमा को संरक्षित किया जा सकता है।
यह मांग स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। वैष्णव समुदाय के लोगों में इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। संगठन का कहना है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखना विकास की राह में बाधा नहीं, बल्कि सही दिशा प्रदान करता है।
नाथद्वारा की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए इस कदम से उम्मीद जगी है कि सरकार श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए उचित निर्णय लेगी। पवित्र नगरी के रूप में नाथद्वारा का आधिकारिक घोषणापत्र न केवल धार्मिक मर्यादा की रक्षा करेगा, बल्कि भविष्य में पर्यटन विकास को भी अधिक सात्विक और सशक्त आधार प्रदान करेगा।