डायलिसिस एक्सेस: भारत में CKD मरीजों के लिए Vascular Surgeon की बढ़ती आवश्यकता
नई दिल्ली : भारत में Chronic Kidney Disease (CKD) और End-Stage Kidney Disease (ESKD) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर वर्ष हजारों न...
नई दिल्ली : भारत में Chronic Kidney Disease (CKD) और End-Stage Kidney Disease (ESKD) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर वर्ष हजारों नए मरीजों को हीमोडायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। डायलिसिस की सुविधाएँ बढ़ रही हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण चुनौती आज भी बनी हुई है—समय पर सुरक्षित और टिकाऊ vascular access की उपलब्धता तथा प्रशिक्षित Vascular Surgeons की कमी।
Indian Journal of Vascular and Endovascular Surgery में प्रकाशित "Arteriovenous Access: The Unsung Hero of Vascular Surgery – An Indian Perspective" में भी इस बात पर बल दिया गया है कि भारत में dialysis access की सबसे बड़ी चुनौतियों में समय पर विशेषज्ञ तक पहुँच और vascular access सेवाओं का सीमित प्रसार शामिल है।
वास्तविक समस्या यह है कि अधिकांश मरीज Vascular Surgeon के पास तब पहुँचते हैं जब डायलिसिस पहले ही शुरू हो चुकी होती है। कई मरीज महीनों तक temporary catheter के सहारे डायलिसिस करवाते रहते हैं, कुछ की नसें बार-बार catheter के कारण खराब हो जाती हैं और कई मरीज पहली AV Fistula के फेल होने के बाद ही विशेषज्ञ तक पहुँचते हैं। यदि CKD के उन्नत चरण (Stage 4–5) में ही referral हो जाए, तो समय रहते उपयुक्त vascular access की योजना बनाई जा सकती है।
Hemodialysis के लिए सबसे विश्वसनीय access Arteriovenous Fistula (AVF) माना जाता है। जब अपनी नसें उपयुक्त न हों, तब AV Graft उपयोगी विकल्प हो सकता है। तत्काल डायलिसिस की आवश्यकता होने पर Permcath लगाया जाता है, जबकि temporary catheter केवल आपातकालीन परिस्थितियों के लिए होना चाहिए।