इससाल, 30 सेअधिकदेशोंसे 600+ कलाकारइकट्ठाहुए।भारत, लिथुआनिया, पोलैंड, नेपाल, दक्षिणकोरिया, स्लोवाकिया, ग्रीस, रूस, क्यूबा, श्रीलंका, स्पेन, इक्वाडोर, अल्जीरिया, मलेशिया, किर्गिस्तान, कज़ाकिस्तान, कराकल्पकस्तान, इथियोपिया, लेसोथो, मेडागास्कर, तंजानिया, दक्षिणसूडान, ज़ाम्बिया, मोज़ाम्बिक, भूटान, ज़िम्बाब्वे, म्यांमार, बांग्लादेश, युगांडाऔरघानाकेडैलिगेटोंनेकैंपसकोअपनीलय, रंगऔरविरासतसेभरदिया, क्योंकिप्रत्येकग्रुपअपनीखासपहचानलेकरआया, औरअलग-अलगमहाद्वीपोंकीपरंपराओं, कहानियोंऔरआर्टफॉर्म्सकाजीता-जागतामोज़ेकबनाया।
इसउत्सवकाशानदारउदघाटन 25 नवंबरकोस्टैच्यूऑफ़यूनिटीपरकियागया।दुनियाभरकेकलाकारदुनियाकीसबसेबड़ीमूर्तिकेबैकग्राउंडमेंग्लोबलयूनिटीऔरशांतिकीशपथलेनेकेलिएएकत्रहुए।यहपलसरदारवल्लभभाईपटेलकोश्रद्धांजलिकेतौरपरपेशकियागयाऔरइसउत्सवकेसाझेउदेश - एकता, आपसीसम्मानऔरएकबेहतरदुनियाकीचाहतकोदिखाताथा।पांचदिनोंकेदौरान, पारुलयूनिवर्सिटीकैंपसएकरंगीनसांस्कृतिकस्थानबनगया।हरदेशकेखासलोकगीत, सांस्कृतिकरस्मेंऔररंगीनडांसनेदर्शकोंकोमंत्रमुग्धऔरहैरानकरदिया।इसउत्सवमेंअलग-अलगसांस्कृतिकोकलाकीवैश्विकभाषाकेज़रिएएकसाझीजगहमिली।
भारतसरकारकीपूर्वविदेशऔरसंस्कृतिराज्यमंत्री, श्रीमतीमीनाक्षीलेखीनेकहा, “सरदारवल्लभभाईपटेलकी 150वींजयंतीकोवैश्विकसांस्कृतिकउत्सवकेसाथमनानासचमेंबहुतमहत्वपूर्णहै।उनकीविरासतहमेंसिखातीहैकिजबलोगमिलकरकामकरतेहैं, तोउनकीताकतकईगुनाबढ़जातीहै।ऐसेउत्सवहमेंयाददिलातेहैंकिकलारुकावटोंकोतोड़सकतीहैऔरहमारीपहचानकोमज़बूतकरसकतीहै।” इसीबारेमेंबोलतेहुए, डॉ. दर्शनावसावा, MLA, नंदोद, नर्मदानेकहा, “यहांहरप्रदर्शनसिर्फकलाहीनहींहै, बल्किइतिहासकाएकहिस्सा, परंपराकीआवाज़औरदेशोंकेबीचएकब्रिजभीहै।दुनियाकोएकहीमंचपरएककरनासिर्फएकघटनाहीनहींहै, बल्कियहएकऐसीसांस्कृतिहैजिसकासमर्थनकरनेपरहमेंगर्वहै।”
इससफलएडिशनपरटिप्पणीकरतेहुए, पारुलयूनिवर्सिटीकेप्रेसिडेंट, डॉ. देवांशुपटेलनेकहा: “इसउत्सवनेहमेंएकबारफिरयादकरायाकिजबसांस्कृतिएकसाथआतेहैं, तोदुनियाथोड़ीऔरजुड़जातीहै, औरथोड़ीऔरदयालुहोजातीहै।यहांप्रदर्शनकरनेवालेहरआर्टिस्टनेनसिर्फअपनाटैलेंट, बल्किअपनीविरासत, अपनागर्वऔरएकताकीभावनाभीदिखाईहै।हमइससेलिब्रेशनकोऔरमतलबवालाबनानेकेलिएवहांमौजूदहरदेशकेलोगोंकाधन्यवादकरतेहैं।”
इससालकाइंटरनेशनलफोकलोरफेस्टिवलनसिर्फअपनेप्रदर्शनकेलिएबल्किदेशों, समुदायोंऔरइसेमहसूसकरनेवालेहरइंसानकेबीचबनीअपनीगर्मजोशीकेलिएभीयादकियाजाएगा।अपनेतीसरेएडिशनकेशानदारतरीकेसेखत्महोनेकेबाद, पारुलयूनिवर्सिटीनेकलाकेज़रिएवैश्विकसांस्कृतिकसंवादकोबढ़ावादेनेऔरविविधताकाजश्नमनानेकाअपनीप्रतिबद्धताकोजारीरखाहै।