विश्व संगीत दिवस 2026 पर कोलकाता स्वतंत्र संगीत की भावना से गूंज उठा

  सौरेंद्रो-सौम्यजित का विश्व संगीत दिवस कॉन्सर्ट 2026 — नेताजी इनडोर स्टेडियम में दिग्गजों और समकालीन कलाकारों का एक ऐतिहासिक संगम   कोलकात...

JR Choudhary
JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Editorial Desk
Jun 24, 2026 • 8:05 PM  4  0
Last Edited By: Mamta Choudhary (27 days ago)
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विश्व संगीत दिवस 2026 पर कोलकाता स्वतंत्र संगीत की भावना से गूंज उठा
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24 Jun 2026
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विश्व संगीत दिवस 2026 पर कोलकाता स्वतंत्र संगीत की भावना से गूंज उठा
विश्व संगीत दिवस 2026 पर कोलकाता स्वतंत्र संगीत की भावना से गूंज उठा

 सौरेंद्रो-सौम्यजित का विश्व संगीत दिवस कॉन्सर्ट 2026 — नेताजी इनडोर स्टेडियम में दिग्गजों और समकालीन कलाकारों का एक ऐतिहासिक संगम

 
कोलकाता (पश्चिम बंगाल), 24 जून : कोलकाता के सांस्कृतिक इतिहास के सबसे भावनापूर्ण संगीतमय संध्याओं में से एक के रूप में स्मरणीय रहने वाले इस समारोह में सौरेंद्रो-सौम्यजित के विश्व संगीत दिवस कॉन्सर्ट का 16वां संस्करण 21 जून 2026 को नेताजी इनडोर स्टेडियम में असाधारण कलाकारों के एक अद्वितीय नक्षत्रमंडल को एकजुट करने में सफल रहा। प्रसिद्ध पियानोवादक-गायक जोड़ी सौरेंद्र मल्लिक और सौम्यजित दास द्वारा निर्देशित इस हाउसफुल आयोजन में हजारों संगीत प्रेमीयों ने शिरकत की, जिन्होंने विधाओं, पीढ़ियों और भौगोलिक सीमाओं से परे एक अविस्मरणीय अनुभव साझा किया।
इस संध्या की थीम — स्वतंत्र संगीत की भावना — गुलज़ार, हरिहरन, शंकर महादेवन, शिल्पा राव, विशाल भारद्वाज, रेखा भारद्वाज, विश्व मोहन भट्ट, अनुपम रॉय, कल्पना पटोवारी, पार्वती बाउल, सिड श्रीराम, आयान अली बंगश, निखिता गांधी और बेनी दयाल जैसे अनुपम कलाकारों की आवाज़ में प्रतिफलित हुई। प्रत्येक कलाकार ने व्यक्तिगत चिंतन और सृजनात्मक साहस से जन्मी एक मौलिक रचना प्रस्तुत की — विशेष रूप से इसी एक संध्या के लिए निर्मित, जो फिर कभी न दोहराई जा सके।
यह कॉन्सर्ट भारत की संगीत विरासत का एक जीवंत मोज़ेक था। लोक संगीतकार और शास्त्रीय संगीत के महारथी रैपर्स और समकालीन कलाकारों के साथ एक ही मंच साझा करते नज़र आए। पिंगला के पटचित्र कलाकार, केरल के तविल वादक, राजस्थान के मंगनियार और मणिपुर की बेदाबती — विविध परंपराओं और भूगोलों से आई आवाज़ें — ने मिलकर एक ऐसे ताने-बाने की रचना की जो सर्वथा नई थी, पर गहरे अर्थ से जड़ि भी। नेताजी इनडोर स्टेडियम का मंच वास्तव में भारत की विशाल सांस्कृतिक आत्मा का एक माप बन गया।
“कोलकाता में विश्व संगीत दिवस हमेशा से इस शहर के संगीत के साथ असाधारण संबंध का प्रतिबिंब रहा है — और सौरेंद्रो-सौम्यजित का इस वर्ष का कॉन्सर्ट उसका संमुज्ज्वलतम अध्याय साबित हुआ। गुलज़ार साहब के शब्दों, शंकर महादेवन की आवाज़, विशाल भारद्वाज की कला और इतने सारे महान संगीतकारों को स्वतंत्र सृजन की भावना से एक ही मंच पर आते देखना अलौकिक से कम नहीं था। कोलकाता हमेशा से जानता रहा है कि संगीत मनोरंजन मात्र नहीं — यह आत्मा की भाषा है। कल की संध्या ने सिद्ध किया कि यह विश्वास जीवित है, पल्लवित है, और गहराई से संजोया हुआ है।” — संदीप भूतोड़िया, सांस्कृतिकविद और ट्रस्टी, प्रभा खैतान फाउंडेशन
“गुलज़ार साहब मेरे लिए केवल एक दिग्गज नहीं हैं — वे दो दशकों से अधिक समय से मेरे प्रिय मित्र हैं। हमारा रिश्ता केवल प्रशंसा तक सीमित नहीं — यह गहरे व्यक्तिगत स्नेह और कला के प्रति सांझी अनुराग से निर्मित है। इसलिए इस उत्सवपूर्ण अवसर पर मुझे अत्यंत आनंद और गौरव हुआ कि मैं उन्हें औपचारिक रूप से कविगुरु रविंद्रनाथ ठाकुर की एक पेंटिंग समर्पित कर सका — जिसे सुवाप्रसन्न नामक विख्यात चित्रकार ने रचा है। मानवता की आत्मा के दो दीप्तिमान — एक संकेत से एकजुट। गुलज़ार साहब को ठाकुर की छवि से बड़ा कोई सम्मान नहीं हो सकता — क्योंकि दोनों ने मानवता को वे शब्द दिए हैं जो इलाज करते हैं, उन्नत करते हैं, और युगों तक अमर रहते हैं।” — संदीप भूतोड़िया
कॉन्सर्ट के क्यूरेटर और कलात्मक निदेशकों ने आयोजन के बाद अपने विचार साझा किए: “विश्व संगीत दिवस 2026 सहयोग, प्रयोग और मौलिक रचना के माध्यम से भारत की ध्वनि की एक खोज थी। सबसे बढ़कर, यह कलात्मक स्वतंत्रता, सृजनात्मक साहस और स्वतंत्र संगीत की उस शक्ति का उत्सव था जो संस्कृतियों और समुदायों को जोड़ती है। हम हर कलाकार, हर टीम सदस्य और उस सभागार में मौजूद हर संगीत प्रेमी के आभारी हैं जिन्होंने इस संध्या को अभूतपूर्व बनाया,” सौरेंद्रो-सौम्यजित ने कहा।
जो सपना 16 वर्ष पहले दो कोलकातावासी संगीतकारों ने देखा था, वह आज भारत की सबसे प्रिय वार्षिक संगीतमय परंपराओं में से एक बन चुका है। हर संस्करण अपनी कहानियां, अपनी मित्रताएं और एकबारगी सहयोग लेकर आया। 2026 का संस्करण, स्वतंत्र आवाज़ों के उत्सव के साथ, उस विरासत में एक और अमिट अध्याय जोड़ गया।
जो लोग इस वर्ष उपस्थित नहीं हो सके, उनके लिए कॉन्सर्ट की रिकॉर्डिंग और मुख्य क्षण जल्द ही सौरेंद्रो-सौम्यजित के अधिकृत चैनल्स पर साझा किए जाएंगे। रौशनी भले ही मंद पड़ गई हो, अंतिम सुर भले ही थम गया हो — पर संगीत, स्मृतियां और 21 जून 2026 को बने वे रिश्ते शायद ही कभी फ़ीके पड़ें।
 
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