थूकने की समस्या का समाधान बन कर उभरा 'ईजीस्पिट', सरकार का भी मिला सपोर्ट
ईजीस्पिट स्टार्टअप का उद्देश्य सार्वजनिक जगह थूकने की बढ़ती समस्या पर अंकुश लगाने के लिए भारत मे इको-फ्रेंडली स्पिटून के उत्पाद के बारे में जागरूकता फैलाना है। यह अभियान मानव थूक के कचरे से पौधों को विकसित करने के विचार के साथ बनाया गया है। जैसा की हम सभी जानते है की खुले में थूकने की आदत बहुत
ईजीस्पिट स्टार्टअप का उद्देश्य सार्वजनिक जगह थूकने की बढ़ती समस्या पर अंकुश लगाने के लिए भारत मे इको-फ्रेंडली स्पिटून के उत्पाद के बारे में जागरूकता फैलाना है। यह अभियान मानव थूक के कचरे से पौधों को विकसित करने के विचार के साथ बनाया गया है।
जैसा की हम सभी जानते है की खुले में थूकने की आदत बहुत ख़राब होती है और इसके दाग धब्बों को साफ करना अपने आप में एक चुनौती है। अगर हम किसी भी सार्वजानिक स्थान पर थूकते हैं तो उसके कण 27 फीट तक हवा मे फैल सकते है। यह कीटाणु सभी उम्र के लोगों के लिए घातक है जिनमें बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाऐं भी शामिल हैं, यही नहीं देश में टीबी जैसी बीमारी को फ़ैलाने में भी इन्हीं थूक से उत्पन्न कीटाणुओं का अहम योगदान है। वैश्विक महामारी कोविड-19 की पहली व दूसरी लहर के दौरान भी सार्वजानिक स्थानों में थूकना मना किया गया था ताकि वायरस का फैलाव को रोका जा सके।
ईजीस्पिट के साथ मिलकर कई बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत को स्पीट फ्री बनाने के लिए काम कर रही है लिस्ट में भारतीय रेल, रिलायंस, टाटा हिताची, रेमंड, ऐम्स हॉस्पिटल, जेएसडब्लू (भूषण स्टील यूनिट), आई एम टी इंस्टिट्यूट, दिल्ली पब्लिक स्कूल और औरंगाबाद मुंसिपल कारपोरेशन और कई बड़े नाम शामिल है।
ईजीस्पिट अब तक 17,40,17,386 करोड़ स्पिट्स लॉक कर चुका है और इसका सीधा फायदा देश के लगभग 52,22,10,000 करोड़ लोगों को हुआ है।