कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’

हैदराबाद, तेलंगाना, भारत : पीढ़ियों से इस कला में माहिर भारतीय हैंडलूम (हथकरघा) बुनकरों को उन्हीं की अपनी कहानी से बाहर किया जा रहा था। उनके द्वारा बनाए गए कपड़े या तो संग्रहालयों तक सीमित रह गए या उन पर केवल “एथनिक वियर” (ethnic wear) का ठप्पा लगा दिया गया। इस बीच उनकी आजीविका अन

JR Choudhary
JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Editorial Desk
Apr 27, 2026 • 1:43 PM  0  0
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कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’
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27 Apr 2026
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कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए हैंडलूम को रोज़मर्रा के फैशन से जोड़ रहा ‘इंडियन पीकॉक’

  

हैदराबाद, तेलंगाना, भारत : पीढ़ियों से इस कला में माहिर भारतीय हैंडलूम (हथकरघा) बुनकरों को उन्हीं की अपनी कहानी से बाहर किया जा रहा था। उनके द्वारा बनाए गए कपड़े या तो संग्रहालयों तक सीमित रह गए या उन पर केवल “एथनिक वियर” (ethnic wear) का ठप्पा लगा दिया गया। इस बीच उनकी आजीविका अनिश्चित होती गई और उनका ज्ञान धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया।


इंडियन पीकॉक’ के हर परिधान के पीछे हैं इन कारीगरों के हाथ

ऐसा इसलिए नहीं है कि इस शिल्प (craft) का कोई मूल्य नहीं बचा, बल्कि इसलिए है क्योंकि करघे (loom) से लेकर रोज़मर्रा के जीवन तक के सफर में बहुत सी बाधाएं हैं।

JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Editorial Desk

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