Poetry: कश्मकश जिंदगी की

कश्मकश जिंदगी की.... बताना तो बहुत कुछ चाहता हूँ, पर बता कहाँ पाता हूँ, सच तो यह है कि हर पल जीना है तेरे बिना, पर एक पल भी जी कहाँ पाता हूँ कोशिश तो पल-पल होती है तुझे भुलाने की, पर एक पल भी कहा भुला पाता हू देखना चाहता हूँ हर रात ख्वाब

JR Choudhary
JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Editorial Desk
Sep 7, 2019 • 12:53 PM  0  0
लाइफस्टाइल
NEWS CARD
Logo
Poetry: कश्मकश जिंदगी की
“Poetry: कश्मकश जिंदगी की”
Favicon
Read more on marudharabharti.com
7 Sep 2019
https://www.marudharabharti.com/lifestyle/poetry
Copied
Poetry: कश्मकश जिंदगी की
                 कश्मकश जिंदगी की....

बताना तो बहुत कुछ चाहता हूँ, पर बता कहाँ पाता हूँ,

सच तो यह है कि हर पल जीना है तेरे बिना, पर एक पल भी जी कहाँ पाता हूँ


कोशिश तो पल-पल होती है तुझे भुलाने की, पर एक पल भी कहा भुला पाता हू

देखना चाहता हूँ हर रात ख्वाब तुम्हारे पर,  खुद को कहा सुला पाता हैं!


तू अगर देख पाती तो समझ तो समझ जाती कि इस लाचारी को, कहाँ छुपा पाता हूँ!

बह जाता है सितम आंखो से, पर सह भी कहाँ पाता हूँ!


नामुमकिन है जीना तेरे बिना, पर मजबूर हूँ मर ही कहाँ पाता हूँ!


अजीब काश्मकश है ज़िंदगी कि, सोचता हूँ कि फिर से तुझे मना लूँ,

पर सच तो यह कि यह कोशिश ही कहा कर पाता हूँ..!!

          

          दिनेश आकवा ( मि.पंचाल )
history This is an archived post. The information provided may be outdated.

JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Editorial Desk

Editor

Recommended Posts

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter