बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) और इंस्टीट्यूट ऑफ एक्चुअरीज ऑफ इंडिया (IAI) ने प्रोफेशनल लर्निंग को मजबूत करने और उभरते क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने के मकसद से एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते पर बिमटेक के डीन एवं डिप्टी डायरेक्टर डॉ. पंकज प्रिया और IAI की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. रुचिता वर्मा ने दस्तखत किए।
इस एमओयू के तहत दोनों संस्थान अगले एक साल में 2-3 सर्टिफिकेशन प्रोग्राम मिलकर तैयार करेंगे, जिनमें मैनेजमेंट एजुकेशन और एक्चुरियल साइंस की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा। इस सिलसिले में पहला कार्यक्रम "सर्टिफिकेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑन कार्बन क्रेडिट्स एंड कार्बन मार्केट्स" शुरू किया जा रहा है, जिसका मकसद वर्किंग प्रोफेशनल्स और सस्टेनेबिलिटी क्षेत्र से जुड़े लोगों को तेज़ी से बदल रही कार्बन इकोनॉमी की व्यावहारिक जानकारी देना है।
क्यों अहम है यह पहल
भारत में कार्बन मार्केट्स और क्लाइमेट फाइनेंस अभी अपेक्षाकृत नया क्षेत्र है, लेकिन कॉर्पोरेट सेक्टर पर रेगुलेटरी दबाव बढ़ने के साथ इससे जुड़े प्रोफेशनल्स की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। पारंपरिक रूप से एक्चुरियल साइंस बीमा और रिस्क असेसमेंट तक सीमित मानी जाती रही है, लेकिन क्लाइमेट रिस्क और कार्बन ट्रेडिंग जैसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता अब कहीं ज़्यादा व्यापक होती जा रही है। ऐसे में मैनेजमेंट और एक्चुरियल साइंस, दो अलग-अलग विषयों को जोड़कर तैयार किया गया यह प्रोग्राम एक व्यावहारिक कदम माना जा सकता है।
प्रोग्राम की रूपरेखा किसने बनाई
इस कार्यक्रम की रूपरेखा बिमटेक की डायरेक्टर डॉ. प्रबीना राजिब के नेतृत्व में तैयार की गई है। वह ग्लोबल कार्बन मार्केट्स से जुड़े प्रमुख सत्र खुद लेंगी, जिनमें यूरोपियन यूनियन एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम, परफॉर्म-अचीव-एंड-ट्रेड, एनर्जी सेविंग सर्टिफिकेट्स और कार्बन फ्यूचर्स जैसे विषय शामिल होंगे।
इस पहल पर डॉ. प्रबीना राजिब ने कहा कि लो-कार्बन इकोनॉमी की ओर बढ़ना अब सिर्फ पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर बिजनेस, फाइनेंस और जोखिम प्रबंधन से जुड़े फैसलों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कार्बन मार्केट विकसित हो रहे हैं, वैसे-वैसे ऐसे प्रोफेशनल्स की ज़रूरत भी बढ़ रही है जो इन बाजारों की कार्यप्रणाली और उनसे जुड़े अवसरों-जोखिमों को समझते हों।
वहीं IAI की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. रुचिता वर्मा ने बताया कि क्लाइमेट और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में हो रहे तेज़ बदलावों के बीच एनालिटिकल और रिस्क मैनेजमेंट स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स के लिए नए अवसर सामने आ रहे हैं, और बिमटेक के साथ यह एमओयू ऐसे ही उभरते जरूरतों के अनुरूप लर्निंग प्रोग्राम तैयार करने में मददगार साबित होगा।
प्रोग्राम की समयसीमा और विषय
कार्बन क्रेडिट्स और कार्बन मार्केट्स से जुड़ा यह ऑनलाइन सर्टिफिकेशन प्रोग्राम 19 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। यह कार्यक्रम एक्चुअरीज और एक्चुरियल स्टूडेंट्स, फाइनेंस एवं इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स, रिस्क मैनेजर्स, ESG और सस्टेनेबिलिटी प्रोफेशनल्स, पॉलिसी एक्सपर्ट्स, कंसल्टेंट्स, कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स के साथ-साथ क्लाइमेट फाइनेंस में रुचि रखने वाले स्टूडेंट्स के लिए भी तैयार किया गया है।
इंटरैक्टिव ऑनलाइन फॉर्मेट में चलने वाले इस कार्यक्रम में ग्लोबल क्लाइमेट फ्रेमवर्क, कार्बन मार्केट मैकेनिज्म, नेट-जीरो कैलकुलेशन, क्लाइमेट और सस्टेनेबिलिटी रिस्क, वॉलंटरी कार्बन मार्केट्स तथा कंप्लायंस फ्रेमवर्क जैसे विषय शामिल किए गए हैं। इसका मकसद सैद्धांतिक जानकारी को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ना और बिजनेस-वित्तीय फैसलों में कार्बन मार्केट की बढ़ती भूमिका को स्पष्ट करना है।
आगे की दिशा
इस एमओयू के जरिए बिमटेक और IAI लो-कार्बन इकोनॉमी की ओर हो रहे ग्लोबल बदलावों से जुड़े अवसरों और चुनौतियों को समझने में सक्षम प्रोफेशनल्स तैयार करने की दिशा में मिलकर काम करने का इरादा रखते हैं। शिक्षा क्षेत्र में एक्चुरियल साइंस और सस्टेनेबिलिटी को जोड़ने वाली इस तरह की साझेदारियां आने वाले समय में और सामने आ सकती हैं, क्योंकि क्लाइमेट रेगुलेशन को लेकर कॉरपोरेट जगत की जवाबदेही लगातार बढ़ रही है।