परमाणु डिफेन्स संस्थान देहरादून के छात्रों द्वारा उत्तराखंड गढ़वाल क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी नाग टिब्बा पर लहराया तिरंगा

परमाणु डिफेन्स संस्थान देहरादून के छात्रों द्वारा 1 फरवरी को उत्तराखंड गढ़वाल क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी नाग टिब्बा को फ़तेह करके तिरंगा लहराया और उनके द्वारा हमारे देश के वीर शहीदों को ये सफलता समर्पित की गयी । गढ़वाल क्षेत्र में स्थित नाग टिब्बा चोटी उत्तराखंड की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है।

JR Choudhary
JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Editorial Desk
Feb 18, 2023 • 3:11 PM  0  0
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परमाणु डिफेन्स संस्थान देहरादून के छात्रों द्वारा उत्तराखंड गढ़वाल क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी नाग टिब्बा पर लहराया तिरंगा
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18 Feb 2023
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परमाणु डिफेन्स संस्थान देहरादून के छात्रों द्वारा उत्तराखंड गढ़वाल क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी नाग टिब्बा पर लहराया तिरंगा


 परमाणु डिफेन्स संस्थान देहरादून के छात्रों द्वारा 1 फरवरी को उत्तराखंड गढ़वाल क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी नाग टिब्बा को फ़तेह करके तिरंगा लहराया और उनके द्वारा हमारे देश के वीर शहीदों को ये सफलता समर्पित की गयी । गढ़वाल क्षेत्र में स्थित नाग टिब्बा चोटी उत्तराखंड की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। इसकी ऊंचाई 9,915 फ़ीट है। परमाणु डिफेन्स संस्थान के सदस्यों द्वारा तिरंगा लहराते हुए एक्सक्लूसिव फोटो-वीडियो उपलब्ध करवाए। उनका कहना है कि उनके लिए ये अत्यंत गौरव का पल है। इससे पहले भी परमाणु संस्थान के छात्र इस तरह के ट्रैकिंग टूर पर जाते रहते हैं। इस ट्रैकिंग दल में लगभग 40 छात्रों और संस्थान के शिक्षकों द्वारा चढ़ाई की गयी थी। नाग टिब्बा चोटी 9915 फ़ीट की ऊंचाई पर है।

परमाणु संस्थान के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि नाग टिब्बा ट्रेक दुनिया भर के साहसिक प्रेमियों के लिए एक शानदार स्थान है। यहां से आपको स्वर्गरोहिणी, बंदरपूंछ, काला नाग, श्रीखंड महादेवऔर गंगोत्री जैसी बर्फ से ढकी हिमालय पर्वतमालाओं का 100 डिग्री का नजारा दिखाई देता है।नाग टिब्बा में नाग का अर्थ नाग देवता और ‘टिब्बा का अर्थ ऊंच शिखर या पहाड़ से है। मान्यता के अनुसार इस मंदिर में अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने पालतू जानवरों की सुरक्षा के लिए यहां पर प्रार्थना करने आते रहते हैं।

नाग टिब्बा की ट्रेकिंग करते समय पगडंडी के एक तरफ पहाड़ों की ऊंची चोटियों के साथ-साथ बहुत सारे चीड़ और देवदार के वृक्ष देखने को मिलें एवं दूसरी तरफ एक गहरी खाई, जिसे देखते हुए ट्रेक करने का एक अलग ही अंदाज होता है। यह ट्रेक मुख्य रूप से पहाड़ों पर कैंपिंग करने वालों और पहाड़ों पर खुद से खाना बनाकर खाने वालों की सबसे पहली पसंद है।ज्यादातर छात्रों के लिए इस तरह के ट्रेक पर जाना बहुत ही बेहतरीन अनुभव था और कई छात्रों के लिए पहला भी / संस्थान के एक अधिकारी आशीष सक्सेना व् सदस्य नीतू द्वारा बताया गया की यहाँ का मौसम काफी ठंडा था और रात में तापमान -10 डिग्री से भी ऊपर दर्ज किया गया जिसके लिए सभी छात्रों को गरम कपडों और जैकेट्स की व्यवस्था करवाई गयी और दल के सभी सदस्यों के लिए गरम जल की व्यवस्था भी की गयी /

JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Editorial Desk

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