Koo App और CERT-In के बीच यह गठबंधन इंटरनेट सुरक्षा पर बेहतर जागरूकता के लिए जारी कार्यों का
हिस्सा है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के दौरान अक्टूबर 2021 में Koo App और सीईआरटी-इन
ने एक भागीदारी की थी। इसका मकसद यूजर्स को फ़िशिंग, हैकिंग, व्यक्तिगत सूचना सुरक्षा, पासवर्ड और
पिन प्रबंधन, क्लिकबैट से बचाव और सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते हुए अपनी गोपनीयता की रक्षा
करने संबंधित मुद्दों पर शिक्षित करना था।
इस संबंध में Koo App के प्रवक्ता ने कहा, ‘बहुभाषी मंच के रूप में Koo स्थानीय भाषाओं में खुद को
ऑनलाइन व्यक्त करने में कू भारतीयों की मदद करता है। इंटरनेट सुरक्षा और जिम्मेदारी भरे यूजर्स व्यवहार
को बढ़ावा देने के मामले में कू सबसे आगे है। ऑनलाइन फ्रॉड और द्वेष को रोकने के साथ ही यूजर्स को
स्वस्थ कंटेंट बनाने और सार्थक चर्चा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए हमारे पास मजबूत तंत्र मौजूद है।
हमें
सेफ इंटरनेट डे पर इंटरनेट को एक बेहतर स्थान बनाने के लिए सीईआरटी-इन के साथ जुड़कर प्रसन्नता हो
रही है।’
सीईआरटी-इन साइबर सुरक्षा के मामलों पर प्रतिक्रिया देने के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है। सीईआरटी-इन
और Koo App ने 8 फरवरी 2022 को आयोजित ‘सेफर इंटरनेट डे’ के मौके पर संयुक्त अभियान चलाए हैं।
इसके अंतर्गत साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में साइबर सुरक्षा जागरूकता पैदा करने, ऑनलाइन सुरक्षा और सावधानी
के संबंध में इंटरनेट यूजर्स को संवेदनशील बनाने और नागरिकों के लिए विस्तृत कार्यक्रम आयोजित करना
शामिल है। Koo App का बहुभाषी मंच नागरिकों के बीच उनकी स्थानीय भाषा में जागरूकता पैदा करने
में प्रभावी रहा है। 8 फरवरी 2022 को सेफर इंटरनेट डे 2022 गतिविधियों के हिस्से के रूप में सीईआरटी-इन
को पूरी उम्मीद है कि सभी यूजर्स समझेंगे कि प्रौद्योगिकी उन्हें सशक्त बनाती है और वे साइबर स्पेस को
अधिक सार्थक बनाने के लिए एक जिम्मेदार तरीके से तकनीकी का इस्तेमाल करेंगे ताकि रचनात्मकता और
नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।
कू के बारे में
Koo App की लॉन्चिंग मार्च 2020 में भारतीय भाषाओं के एक बहुभाषी, माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के रूप में
की गई थी, ताकि भारतीयों को अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति करने में सक्षम किया जा सके। भारतीय
भाषाओं में अभिव्यक्ति के लिए एक अनोखे मंच के रूप में Koo App भारतीयों को हिंदी, मराठी, गुजराती,
पंजाबी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, असमिया, बंगाली और अंग्रेजी समेत 10 भाषाओं में खुद को ऑनलाइन मुखर
बनाने में सक्षम बनाता है। भारत में, जहां 10% से अधिक लोग अंग्रेजी में बातचीत नहीं करते हैं, Koo App
भारतीयों को अपनी पसंद की भाषा में विचारों को साझा करने और स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्ति के लिए सशक्त
बनाकर उनकी आवाज को लोकतांत्रिक बनाता है।
मंच की एक अद्भुत विशेषता अनुवाद की है जो मूल टेक्स्ट
से जुड़े संदर्भ और भाव को बनाए रखते हुए यूजर्स को रीयल टाइम में कई भाषाओं में अनुवाद कर अपना संदेश
भेजने में सक्षम बनाती है, जो यूजर्स की पहुंच को बढ़ाता है और प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रियता तेज़ करता है।
प्लेटफॉर्म ने हाल ही में 2 करोड़ डाउनलोड का मील का पत्थर छुआ है और अगले एक साल में 10 करोड़
डाउनलोड तक पहुंचने की ओर अग्रसर है। राजनीति, खेल, मीडिया, मनोरंजन, आध्यात्मिकता, कला और
संस्कृति के मशहूर लोग द्वारा अपनी मूल भाषा में दर्शकों से जुड़ने के लिए सक्रिय रूप से मंच का लाभ उठाते
हैं।