Poetry: फिर बना लूंगी
फिर बना लूंगी तू जला, कितना जलाता है, मैं फिर बना लुंगी, मैं औरत हूँ, अपना घर फिर से बना लूंगी, मैं भी देखती हूँ, बन कितना बनता है बेहरम तू, जब प्यार किया है तुझसे तो धोखा भी खा लूंगी , मैं औरत हूँ, अपना घर फिर से बना लूंगी, कमजोर ना समझना म