नई रिपोर्ट भारत के 11000 किलोमीटर लम्बे तटीय क्षेत्र पर मंडराते जलवायु संकट की चेतावनी देती है

मुंबई, महाराष्ट्र, भारत भारत के तटीय क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन का संकट मंडरा रहा है। अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा रिलीजRead Now ►

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NewsVoir Verified Media or Organization • 16 May, 2026 Agency
May 30, 2026 • 4:32 PM  2  0
Last Edited By: Mamta Choudhary (49 minutes ago)
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नई रिपोर्ट भारत के 11000 किलोमीटर लम्बे तटीय क्षेत्र पर मंडराते जलवायु संकट की चेतावनी देती है
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नई रिपोर्ट भारत के 11000 किलोमीटर लम्बे तटीय क्षेत्र पर मंडराते जलवायु संकट की चेतावनी देती है
नई रिपोर्ट भारत के 11000 किलोमीटर लम्बे तटीय क्षेत्र पर मंडराते जलवायु संकट की चेतावनी देती है

मुंबई, महाराष्ट्र, भारत

भारत के तटीय क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन का संकट मंडरा रहा है। अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा रिलीज की गई रिपोर्ट इंडियन कोस्टल रीजन : क्लाइमेट प्रोजेक्शन 2021-2040 के अनुसार यह संकट अगले कुछ सालों में जिंदगियों, रोजगार की स्थितियों और पारिस्थितिक तंत्र को बदल देगा।

संतोनु गोस्वामी, प्रोफेसर, स्कूल ऑफ़ क्लाइमेट चेंज एंड सस्टेनेबिलिटी, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु

निकट भविष्य (2021-2040) की संभावनाओं पर ध्यान देते हुए यह अध्ययन नीति-निर्माताओं और स्थानीय समुदायों के लिए व्यावहारिक अंतर्दृष्टियां प्रदान करता है। इस अध्ययन के लिए CMIP6* मॉडल का इस्तेमाल किया गया है, जिसे क्षेत्रीय स्तर की सटीकता बढ़ाने के लिए संतुलित किया गया है। यह रिपोर्ट आगाह करती है कि अनुकूलन का समय बड़ी तेजी से घटता जा रहा है क्योंकि भारत के सभी प्रशासनिक क्षेत्रों में जल्दी ही 1.5 डिग्री सेल्सियस की वार्मिंग सीमा को छूने का खतरा पैदा हो चुका है।

अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सीईओ अनुराग बेहार ने कहा कि, “जलवायु परिवर्तन कोई सुदूर भविष्य की चुनौती नहीं है, यह आज की सच्चाई है। 2040 महज 14 साल दूर है। ये आंकड़े जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को उसकी तात्कालिकता के साथ सामने रखते हैं और इस समस्या से सामूहिक तौर पर निपटने के लिए अपने बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक तंत्र में बदलाव की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

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