स्वामीकैलाशानंदगिरिजीमहाराजनेकहाकिसनातनधर्मआदि-अनादि, शाश्वतएवंविश्वकल्याणकामार्गदर्शकहै।उन्होंनेयहभीकहाकिसनातनकीमूलभावनासेजुड़नेवालाप्रत्येकव्यक्तिअपनेजीवनमेंस्वतःदिव्यता, सद्गुणऔरसंतुलनकाअनुभवकरताहै।गौ-सुरक्षा, भारतीयसंस्कृतिकासंरक्षणऔरविश्वमेंसनातनमूल्योंकाप्रसारप्रत्येकधर्मनिष्ठनागरिककीपवित्रजिम्मेदारीहै।
इसअवसरपरडॉ. अभिषेकवर्मानेभीअपनेविचाररखतेहुएकहाकि “यहमनुष्यकामहानसौभाग्यहैकिउसेमानवजन्मप्राप्तहुआ, उससेभीमहानसौभाग्यकिवहभारतवर्षमेंजन्मा, औरइससेभीबढ़करसौभाग्ययहकिवहसनातनधर्मसेफलीभूतहिन्दूपरिवारमेंजन्मा।
डॉ. वर्मानेआगेकहाकिव्यक्तिकेजीवनमेंजबकैलाशानंदजीजैसेमहामानवसंतकाआशीर्वादप्राप्तहोताहै, तभीधर्मऔरराष्ट्रकीसेवाकरनेकीशक्तिऔरसंकल्पसिद्धहोताहै।उन्होंनेयहभीकहाकिआजजहाँविश्वएकविशेषसंप्रदायकीकट्टरतासेपीड़ितहै, वहींभारतीयसनातनधर्मपूरीमानवताकोशांति, सहिष्णुताऔरअहिंसाकापथदिखारहाहै।
डॉ. वर्मानेविश्वासदिलायाकिअबसमयआगयाहैकिसनातनहिन्दूधर्मकोवैश्विकस्तरपरप्रसारित-प्रचारितकरविश्वशांतिऔरमानवप्रगतिकाअग्रदूतबनायाजाएऔरइसकेलिएवेतन-मन-धनसेसमर्पितरहेंगे।
महाराजश्रीनेडॉ. अभिषेकवर्माद्वाराराष्ट्रहित, भारतीयपरंपराओंकेसंवर्धन, सामाजिकसमन्वयतथासनातनमूल्योंकीरक्षाहेतुकिएजारहेसततप्रयासोंकीसराहनाकी।उन्होंनेकहाकिजोव्यक्तिधर्म, संस्कृतिऔरराष्ट्रसेवाकोसमर्पितहोताहै, वहसमाजमेंकेवलआदरणीयहीनहींबल्किवंदनीयबनजाताहै।
स्वामीजीनेडॉ. वर्माकेसरल, विनम्रएवंसुसंस्कृतव्यक्तित्वकीप्रशंसाकरतेहुएकहाकिवर्मापरिवारपीढ़ियोंसेभारतीयसंस्कृति, साहित्य, परंपराऔरराष्ट्रनिर्माणमेंमहत्वपूर्णयोगदानदेताआयाहै।उन्होंनेशास्त्रीयदृष्टांतोंकाउल्लेखकरतेहुएडॉ. वर्माकेराष्ट्रधर्म, सामाजिकसद्भाव, सनातनसेवाऔरराजनीतिकदायित्वोंमेंउनकेसंकल्पकोप्रेरणास्पदबताया।
पूर्वमेंभीपरमपूज्यश्रीश्री 1008 स्वामीनृत्यगोपालदासजीमहाराज (अध्यक्ष, राममंदिरतीर्थक्षेत्रअयोध्या) तथाजगद्गुरुरामभद्राचार्यजीमहाराजनेडॉ. अभिषेकवर्माकेसनातनधर्मकेप्रसार, गौ-रक्षा, हिंदूसमाजकीसुरक्षातथाधार्मिकजागरूकताकेकार्योंकोदेखतेहुएउन्हेंगौ-रक्षकतथासनातनयोद्धाकीउपाधिप्रदानकीथी।दोनोंमहानसंतोंनेडॉ. वर्माकेजीवनऔरकार्यकोयुवाओं, राष्ट्र, धर्मऔरगौ-सेवाकेलिएप्रेरणास्रोतबतायाहै।
कार्यक्रमकेअंतमेंस्वामीकैलाशानंदगिरिजीमहाराजनेडॉ. अभिषेकवर्मा, श्रीमतीअंकावर्मा, बेटीमिसनिकोलवर्मातथाबेटायुवराजआदितेश्वरवर्मासहितसंपूर्णवर्मापरिवारकोदीर्घायु, स्वास्थ्य, समृद्धिऔरसततईश्वरीयकृपाहेतुशुभाशीषप्रदानकिए।
स्वामी जी ने अपने आशीर्वचनों का समापन सार्वभौमिक कल्याण की प्रार्थना के साथ किया