भूली-बिसरी विरासत में नई जान: हरि चंदना आईएएस की दृष्टि

हैदराबाद ( तेलंगाना ) : हैदराबाद के ऐतिहासिक उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में स्थित अतीत की एक भूली हुई धरोहर — मह लका बाई बावड़ी — आज दशकों की उपेक्षा के बाद पुनर्जीवित होकर फिर से अ

JR Choudhary
JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026Editorial Desk
February 10, 2026 • 7:06 PM
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भूली-बिसरी विरासत में नई जान: हरि चंदना आईएएस की दृष्टि
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10 Feb 2026
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भूली-बिसरी विरासत में नई जान: हरि चंदना आईएएस की दृष्टि

 

हैदराबाद (तेलंगाना) :हैदराबादकेऐतिहासिकउस्मानियाविश्वविद्यालयपरिसरमेंस्थितअतीतकीएकभूलीहुईधरोहर— मह लका बाई बावड़ी — आज दशकों की उपेक्षा के बाद पुनर्जीवित होकर फिर से अपने वैभव में खड़ी है। कभी मलबे से भरी और समय की धूल में खोई यह 18वीं सदी की संरचना अब सावधानीपूर्वक संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्जीवन के माध्यम से एक जीवंत विरासत स्थल में बदल चुकी है।

इस पुनरुत्थान के केंद्र में हैं हरि चंदना आईएएसजिनकी प्रशासनिक सोच निरंतर स्थिरतासंस्कृति और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ती रही है। यह बावड़ी का पुनर्जीवन कोई एकल उपलब्धि नहींबल्कि तेलंगाना भर में विरासत संरक्षण की उस निरंतर परंपरा का हिस्सा हैजिसे उन्होंने नेतृत्व प्रदान किया है।
इस नवजागरण के केंद्र में वही अधिकारी हैंजिनकी प्रशासनिक यात्रा ने तेलंगाना में उपेक्षित स्थानों को जीवंत सार्वजनिक संपत्तियों में बदला है।

JR Choudhary

JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026Editorial Desk

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