डॉ. विशाखा त्रिपाठी का निधन: कैसे जगद्गुरु कृपालु जी महाराज की बेटी ने आगे बढ़ाये जन-कल्याण कार्य
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज जैसे संत इस धरती पर कई शताब्दियों में एक बार आते हैं। श्री कृपालु जी महाराज ने 1922 में उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में जन्म लिया और 16 वर्ष की आयु से ही भगवान् का धुआँधार प्रचार प्रारम्भ कर दिया। 91 वर्षों के अपने जीवन काल में उन्होनें भारत ही नहीं बल
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2 Dec 2024

जगद्गुरुश्रीकृपालुजीमहाराजजैसेसंतइसधरतीपरकईशताब्दियोंमेंएकबारआतेहैं।श्रीकृपालुजीमहाराजने 1922 मेंउत्तरप्रदेशकेएकछोटेसेगाँवमेंजन्मलियाऔर 16 वर्षकीआयुसेहीभगवान्काधुआँधारप्रचारप्रारम्भकरदिया। 91 वर्षोंकेअपनेजीवनकालमेंउन्होनेंभारतहीनहींबल्किपूरीदुनियामेंवेदों-शास्त्रोंकेज्ञानकाभंडारखोलदिया।आध्यात्मिकउन्नतिकेसाथ-साथउन्होनेंलोगोंकीसामाजिकएवंशारीरिकउन्नतिकेलिएभीकईसराहनीयप्रयासकिये, जिन्हेंउनकीज्येष्ठासुपुत्री डॉ. विशाखात्रिपाठीजी नेबहुतलगनकेसाथआगेबढ़ाया।









