लखनऊ (उत्तरप्रदेश), मार्च 25:सनातनधर्मकेवलएकआस्थानहीं, बल्किजीवनजीनेकीएकदिव्यपद्धतिहै, जोआत्माकोपरमात्मासेजोड़नेकामार्गदिखातीहै।युगों-युगोंसेऋषि-मुनियों, संतोंऔरमहापुरुषोंनेइसपवित्रपरंपराकोअपनेतप, त्यागऔरसेवासेजीवंतरखाहै।आजउसीदिव्यपरंपराकोआगेबढ़ानेकाकार्यश्रीशिवशक्तिअनुग्रहपीठकररहीहै, जोपरमपूज्यप्रशांतमहाराजजीकेपावनसान्निध्यमेंधर्म, सेवाऔरसाधनाकाएकअद्भुतकेंद्रबनचुकाहै।
इस पीठ का मूल भाव अत्यंत सरल, किन्तु गहन आध्यात्मिक सत्य से परिपूर्ण है —
“महाराजजीकीसेवाहीशिवत्वहै।”
अर्थात गुरु की सेवा ही भगवान शिव की साक्षात आराधना है। जब मनुष्य निस्वार्थ भाव से सेवा करता है, तो वही सेवा साधना बन जाती है और वही साधना शिवत्व की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
इसी दिव्य संकल्प को साकार करने हेतु दिनांक
29 मार्च 2026, रविवार
वीरबाबामंदिर, गौशाला, सैधरी (लखीमपुरखीरी)
की पुण्यभूमि पर एक अत्यंत भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन का शुभारंभ होने जा रहा है।
इसअवसरपरसमूहिकयज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कारकाआयोजनकियाजाएगा, जोसनातनधर्मके 16 संस्कारोंमेंसेएकअत्यंतमहत्वपूर्णसंस्कारहै।यहसंस्कारबालककोवेदमार्गपरचलनेकीप्रेरणादेताहैऔरउसकेजीवनमेंअनुशासन, संयमतथाज्ञानकासंचारकरताहै।यज्ञोपवीतकेवलएकधागानहीं, बल्कियहआत्माकोधर्मसेजोड़नेकाएकपवित्रसूत्रहै, जोजीवनकोएकनईदिशाप्रदानकरताहै।
इसकेसाथहीइसदिव्यआयोजनकेअंतर्गतश्रीधाममथुराकीनिःशुल्कधामयात्राकाभीविशेषप्रबंधकियागयाहै।इसयात्रामेंश्रद्धालुओंकेलिएआना-जाना, रहनेएवंभोजनकीसंपूर्णव्यवस्थापूर्णतःनिःशुल्करहेगी।यहसेवाविशेषरूपसेसाधु-संतोंएवंआर्थिकरूपसेकमजोरश्रद्धालुओंकेलिएसमर्पितहै, ताकिवेभीबिनाकिसीबाधाकेभगवानश्रीकृष्णकीजन्मभूमिकेदर्शनकरसकेंऔरअपनीआत्माकोभक्तिऔरशांतिसेपरिपूर्णकरसकें।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और समानता का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के स्थान मिलता है। यहाँ न कोई बड़ा है, न छोटा — सभी शिव के अंश हैं, और सभी का स्वागत समान भाव से किया जाता है।
इसदिव्यकार्यकोसफलबनानेमेंशिवशक्तिअनुग्रहपीठपरिवारकेसमर्पितसेवकोंकामहत्वपूर्णयोगदानहै —
श्रीमतीअनुराधामिश्राजी (अध्यक्ष), श्रीसत्यप्रकाशजी (मुख्यसंरक्षक), पूज्यमाताजीपूनममिश्राजी, श्री C. D. दुबेजी, श्रीसंजयसिंहजी, श्रीशारदाकांतपांडेजी, श्रीअश्विनचतुर्वेदीजीएवंश्रीप्रिंसमिश्राजी** — जिनकीनिष्ठा, सेवाऔरसमर्पणइसआयोजनकोदिव्यताप्रदानकररहेहैं।
अंततः, यह आयोजन हमें यह संदेश देता है कि जब हम सेवा को ही साधना मान लेते हैं, तब हमारा प्रत्येक कर्म भगवान की उपासना बन जाता है। यही शिवत्व का मार्ग है, यही सनातन का सार है।
आपसभीश्रद्धालुओंसेविनम्रनिवेदनहैकिइसपावनअवसरपरउपस्थितहोकरइसदिव्यअनुष्ठानएवंधामयात्राकालाभप्राप्तकरेंऔरअपनेजीवनकोधर्ममय, पवित्रएवंसफलबनाएं।
हरहरमहादेव
शंकरमहाराजजीकीजय
जयसनातनधर्म