सीताफल की विविधता एवं पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण हेतु जागरूकता कार्यक्रम

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली एवं महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय के संयुक्त तत्वाधान में सीताफल विविधता एवं पादप आनुवांशिक संसाधनों के संरक्षण हेतु एक दिवसीय जागरूकता प्रशिक्षण एवं लघु मेले का आयोजन गाँव-जसवन्तगढ़, पंचायत समिति - गोगुन्दा

JR Choudhary
JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026Editorial Desk
October 30, 2021 • 4:24 PM
राजस्थान
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सीताफल की विविधता एवं पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण हेतु जागरूकता कार्यक्रम
“सीताफल की विविधता एवं पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण हेतु जागरूकता कार्यक्रम”
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30 Oct 2021
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सीताफल की विविधता एवं पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण हेतु जागरूकता कार्यक्रम

 


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली एवं महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय के संयुक्त तत्वाधान में सीताफल विविधता एवं पादप आनुवांशिक संसाधनों के संरक्षण हेतु एक दिवसीय जागरूकता प्रशिक्षण एवं लघु मेले का आयोजन गाँव-जसवन्तगढ़, पंचायत समिति - गोगुन्दा में दिनांक 29.10.2021 को किया गया। 
 
इस लघु मेले में जसंवतगढ़ के आस-पास गाँव की कुल 150 आदिवासी ग्रामीण महिलाओं ने भाग लिया। लघु मेला भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के ट्राइबल सबप्लान के अन्तर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आर.ए.कौशिक, निदेशक प्रसार शिक्षा ने ग्रामीण आदिवासी महिलाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में कम उपयोग में आने वाले फल जैसे-सीताफल एवं जामुन का प्रसंस्करण महिलाओं को सिखाया गया।
 
आज इस प्रसंस्करण समूह में कुल 500 महिलाएं कार्य कर रही हैं और विपणन द्वारा अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही हैं। इस क्षेत्र में कम उपयोग में आने वाले फलों जैसे कि टिमरू एवं कोठबडी आदि फलों के प्रसंस्करण की भी काफी संभावनाएं हैं। 
 
क्षेत्र में आदिवासी महिलाओं की रूचि मुर्गीपालन में देखते हुए डॉ. कौशिक ने कहा कि अगली बैठक में हम ग्रामीण आदिवासी महिलाओं को प्रतापधन मुर्गी की कुछ इकाईयां वितरित करेंगे ताकि पोषण एवं आर्थिक सुधार हो सके। 
 
डॉ. सुधीर अहलावत, विभागाध्यक्ष, जननद्रव्य, अन्वेषण विभाग, आई.सी.ए.आर., एन.पी.बी.जी.आर., नई दिल्ली ने बताया कि मोटा अनाज का उपयोग आजकल बहुत कम हो गया है। सुदूर क्षेत्रों में कई तरह के अनाज व्याप्त हैं जिन्हें हमने धीरे-धीरे उपयोग में लेना कम कर दिया है और उनका उत्पादन भी कम हो गया है। 
 
ऐसे कई अनाज, फल, सब्जियां हैं जिनका पुनः उत्पादन एवं संरक्षण जरूरी है। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि पुराने अनाजों, सब्जियां, फलों का उत्पाद ही नहीं, संरक्षण भी अपने घरों में करें। इस अवसर पर डॉ. अजित उचोई, डी.सी.एफ., वन विभाग, उदयपुर ने ग्रामीण महिलाओं को जंगल प्राकृतिक रूप से उगने वाले कई फल एवं सब्जियों की जानकारी प्रदान की एवं जैवि विविधता संरक्षण पर विचार व्यक्त किया। 
 
डॉ. एस.के. मलिक, मुख्य वैज्ञानिक, जनन द्रव्य अन्वेषण विभाग, नई दिल्ली ने सभी आंगतुकों का स्वागत किया एवं पादप अनुवांशिकी ब्यूरो की गतिविधियों के बारे में बताया साथ ही डॉ. लतिका व्यास, प्रोफेसर, प्रसार शिक्षा निदेशालय एवं श्री माथुर, प्रोग्राम मेनेजर, आई.सी.आई.सी.आई. फाउण्डेशन ने भी व्याख्यान दिये। 
 
कार्यक्रम में महिलाओं के ज्ञानवर्धन के लिये प्रदर्शिनी लगाई गई जिसमें सीताफल, जामुन के प्रसंस्कृत उत्पाद शहद, मोम एवं टेसूू के फूलों का पाउडर आदि प्रदर्शित किये गये। 
 
कार्यक्रम का संचालन श्री धारीवाल, आई.सी.ए.आर.-एन.पी.बी.जी.आर., नई दिल्ली एवं धन्यवाद श्री राजेश औझा, मेनेजिंग डायरेक्टर, जोवाकी, एग्रोफूड इंडिया ने धन्यवाद किया।

निदेशक प्रसार शिक्षा

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