Key Highlights

  • राजस्थान के अफीम उत्पादक किसानों के लिए वैज्ञानिक खेती पर साप्ताहिक जागरूकता शिविर।
  • महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो का संयुक्त आयोजन।
  • फसल की गुणवत्ता, उन्नत बीज, उर्वरक और रोग-कीट प्रबंधन पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

अफीम किसानों को मिल रही उन्नत खेती की जानकारी

उदयपुर, 09 अगस्त 2026। राजस्थान के अफीम उत्पादक किसानों को अब अपनी फसल की पैदावार और गुणवत्ता सुधारने का मौका मिल रहा है। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT), उदयपुर के वैज्ञानिकों और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में 6 से 11 अगस्त तक साप्ताहिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों का मुख्य मकसद किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से अफीम की खेती करने की जानकारी देना है।

इन शिविरों में चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, कोटा और झालावाड़ जैसे प्रमुख अफीम उत्पादक जिलों से बड़ी संख्या में किसान हिस्सा ले रहे हैं। लंबरदार, जनप्रतिनिधि और गांव के प्रतिनिधि भी कृषि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर तकनीकी जानकारी ले रहे हैं।

विशेषज्ञों का सीधा मार्गदर्शन

राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर के विशेषज्ञ डॉ. अमित दधीच (सहायक आचार्य एवं पौध प्रजनक), डॉ. आर. एन. बुनकर (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पादप रोग विभाग) और डॉ. एन. के. पाडीवाल (तकनीकी सहायक) किसानों को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दे रहे हैं। वे अफीम की उन्नत खेती के तरीके, बेहतर उत्पादन के गुर और फसल को रोग एवं कीटों से बचाने के उपाय समझा रहे हैं। किसानों को यह भी बताया जा रहा है कि उन्नत बीज और उर्वरकों का सही इस्तेमाल कैसे करें, साथ ही रोग-कीट प्रबंधन के लिए क्या कदम उठाएं।

अब तक के शिविर और आगे की योजना

अभियान की शुरुआत 6 अगस्त को चित्तौड़गढ़ से हुई, जहाँ लगभग 300 से 400 किसानों और जनप्रतिनिधियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। इसके बाद, 7 अगस्त को प्रतापगढ़ और छोटी सादड़ी में शिविर लगे, जबकि 8 अगस्त को भीलवाड़ा डिवीजन के सिंगोली में किसानों को जानकारी दी गई।

? Did You Know? भारत दुनिया के उन कुछ देशों में से एक है जहाँ अफीम की खेती कानूनी रूप से औषधीय उद्देश्यों के लिए की जाती है। इसका उपयोग कई महत्वपूर्ण दवाओं के निर्माण में होता है।

आने वाले दिनों में, 9, 10 और 11 अगस्त को कोटा और झालावाड़ जिलों के अफीम उत्पादक किसानों के लिए केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग की देखरेख में ऐसे ही जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। संबंधित जिलों के अफीम अधिकारी और नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी इन शिविरों की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहे हैं।