"गैंग्स ऑफ बिहार" में शामिल हुआ जगीरा


मुंबई : जगीरा को लेकर आजतक अटकलें लगाई जाती रही थीं कि वह आखिर कहाँ उड़न छू हो गया। उसकी हैवानियत के किस्से तो गब्बर सिंह से भी डरावने थे। जगीरा कुत्तों तक को नहीं बख्शता था। दहाड़ता था-मेरा मन, मैं कुत्ता काट के खाऊं! "चाइना गेट" से निकल भागने के बाद भी वह लगातार सक्रिय रहा। 'रिफ्यूजी' के भेष में भी अड़ जाता था, अकड़ जाता था, कहता था - 'जान पे खेलेंगे हम'। किसी भी तरह की 'हवा' 'हवाएं' उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकी और वह "ज़मीन" पर "गंगाजल" छिड़कते छिड़कते जा पहुंचा "एल ओ सी कारगिल" के पार। लेकिन, 'यहां' भी उसकी 'हवस' मिटी नहीं, "अपहरण" और "गोलमाल" जैसी घटनाओं को अंजाम देता रहा। उसे "देशद्रोही" करार दिया गया, फिर भी, वह माना नहीं, "सन ऑफ सरदार" के गेटअप में "चेन्नई एक्सप्रेस" से दक्षिण भारत पहुंच "मोहिनी" का "सेकंड हैंड हस्बैंड" बन गया।
  आखिर में अपने पुराने रूप में आकर "गैंग्स ऑफ वासेपुर" ज्वायन कर झारखंड में उत्पात् मचाने लगा। पर, यहां भी इस "बिन बुलाए बाराती" ने बाकी लोगों की नाम में दम कर दिया। इसी बीच चतुर मो० शफीक़ सैफी ने एक ऑफर लेटर दिया, आजा मेरे "गैंग्स ऑफ बिहार" में शामिल हो जा। तू भी खुश, मैं भी खुश! मामला जम गया और आज जगीरा "गैंग्स ऑफ बिहार" का कमांडर इन चीफ है।
         अब शंका का समाधान। पहली बात तो आप जिसे हत्यारा, बदमाश समझ रहे हैं, वह मूलतः जगीरा नहीं, मुकेश तिवारी है और यह सैफी भी गैगस्टर नहीं एक फिल्म प्रोड्यूसर है। दोनों ही निहायत सज्जन हैं। मुकेश तिवारी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नयी दिल्ली के अपने समय के सर्वश्रेष्ठ छात्र रहे हैं। पहली फिल्म "चाइना गेट" में ही जगीरा के रूप में बॉलीवुड में ही नहीं, सरहद के पार भी चर्चा में आ गए थे। ए ए ए एंटरटेनमेंट के प्रोड्यूसर मो० शफीक़ सैफी ने  एक रीयल क्राईम स्टोरी पर आधारित फिल्म शुरू की है, जिसका शीर्षक है, "गैंग्स ऑफ बिहार"। कुमार नीरज द्वारा लिखित पटकथा पर उनके ही निर्देशन में बनने जा रही इस एक्शन पैक्ड थ्रिलर में मुकेश तिवारी सर्वाधिक महत्वपूर्ण चरित्र विजय यादव की भूमिका निभायेंगे। नज़ीब खान कैमरामैन हैं और अफरोज़ खान संगीत निर्देशक। क्रिसमस तक कास्टिंग खत्म करने के बाद होली में जगीरा, सॉरी मुकेश संग जोगीरा गाकर फिल्म फ्लोर पर जायेगी।

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